एक शनासा छूट रहा है
यार असासा छूट रहा है
हासिल है वो ज़रा ज़रा सा
और ज़रा सा छूट रहा है
चख ली है होंठों की मिसरी
सिर्फ़ बतासा छूट रहा है
सहराओं में बारिश हुई है
जंगल प्यासा छूट रहा है
मेरे अंदर तेरा हिस्सा
अच्छा ख़ासा छूट रहा है
तुम भी कुछ तो सोचो अंकित
हाथ से कासा छूट रहा है
— Ankit Yadav















