एक जैसे लगे कई मौसम
हमको भाए नहीं कभी मौसम
ये नए लोग ये नई राहें
अजनबी शहर अजनबी मौसम
तू है मौजूद पर बहार नहीं
हमको दरकार था यही मौसम
गाँव सूखे हैं शहर डूबे हैं
ख़ूब बदले हैं आदमी मौसम
जो तेरे बाद हम पे आया था
आज तक छाया है वही मौसम
फिर वही धूप से सनी बारिश
फिर वही तुम हो फिर वही मौसम
As you were reading Shayari by Aman Mishra 'Anant'
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