Ambar
Ambar
Ghazal

सभी ख़्वाहिशों का ख़ज़ाना मिले

तुम्हें कोई तुम सा दीवाना मिले

बता दूँ मैं दिल की हर इक दास्ताँ
अगर कोई मुझ को बहाना मिले

न जाए कभी बचपना आप का
हर इक ख़्वाब का आशियाना मिले

कोई पंछी उलफ़त का भूखा न हो
सभी को मुहब्बत का दाना मिले

— Ambar

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