सभी ख़्वाहिशों का ख़ज़ाना मिले
तुम्हें कोई तुम सा दीवाना मिले
बता दूँ मैं दिल की हर इक दास्ताँ
अगर कोई मुझ को बहाना मिले
न जाए कभी बचपना आप का
हर इक ख़्वाब का आशियाना मिले
कोई पंछी उलफ़त का भूखा न हो
सभी को मुहब्बत का दाना मिले
— Ambar
तुम्हें कोई तुम सा दीवाना मिले
बता दूँ मैं दिल की हर इक दास्ताँ
अगर कोई मुझ को बहाना मिले
न जाए कभी बचपना आप का
हर इक ख़्वाब का आशियाना मिले
कोई पंछी उलफ़त का भूखा न हो
सभी को मुहब्बत का दाना मिले
Other ghazal from the same pen
Voices in the same orbit
Poetry by feeling