थोड़ा थोड़ा कर के प्यार जताती हो
अब तो केवल यादों में ही आती हो
याद के ज़रिए हँसता हूँ या रोता हूँ
आँखों में बस आँसू ही तुम लाती हो
ये हंगामा कैसा बरपा है बाहर
देखो शायद जान किसी की जाती हो
देख के मुझको नज़रें फेरी वो जैसे
शायद पीछे अम्मी उसकी आती हो
प्यार तो उनकी आँखों में हम देख चुके
मेबी थोड़ा कहने से कतराती हो
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