बताऊँ क्या मैं जो पूछा है तुम ने क्या है ''इश्क़
न हो सकी जो मुकम्मल वो इल्तिज़ा है ''इश्क़
वो जानते हैं इसे जिनका हमनवा है ''इश्क़
हैं इब्तिदा भी ख़ुद ही ख़ुद ही इंतिहा है ''इश्क़
यक़ीन तुम को नहीं है तो ग़ौर से सुनिए
धड़कते दिल से निकलती हुई सदा है ''इश्क़
तुम्हारे शहर के लोगों को और काम नहीं
हर एक शख़्स यहाँ बस तलाशता है ''इश्क़
बिछड़ते वक़्त कभी भी नहीं कहूँगा मैं
कोई तो आओ बचाओ कि डूबता है ''इश्क़
अभी अभी तो गँवाई है उसने बीनाई
अभी तो उस के लिए बस हरा-भरा है ''इश्क़
उसे ये बात मैं समझाऊँ तो भला कैसे
नया नया है वो आशिक़ नया नया है ''इश्क़
हमारे दौर के लड़कों का हाल है ऐसा
जिसे भी पूछिए कहता है बे-वफ़ा है ''इश्क़
जो सारी बज़्म को इतना उदास छोड़ गया
ये कौन बज़्म से साहिल तेरी उठा है 'इश्क़
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