dil ke gulshan men gar jo aata ''ishq | दिल के गुलशन में गर जो आता ''इश्क़

  - A R Sahil "Aleeg"

दिल के गुलशन में गर जो आता ''इश्क़
फूल चाहत के भी खिलाता ''इश्क़

अपने मेयार को बचाता ''इश्क़
गीत मजनूँ के गुनगुनाता ''इश्क़

शब को फ़ुर्क़त में काटता तन्हा
दिन में वहशत को आज़माता ''इश्क़

इक तरफ़ दिल जलाए बैठा है
इक तरफ़ बत्तियाँ बुझाता ''इश्क़

आप थोड़ा यक़ीन तो करते
एक दिन हम को भी मिलाता ''इश्क़

मैं भी चुपचाप देखता 'साहिल'
छोड़ कर मुझ को दूर जाता 'इश्क़

  - A R Sahil "Aleeg"

More by A R Sahil "Aleeg"

As you were reading Shayari by A R Sahil "Aleeg"

Similar Writers

our suggestion based on A R Sahil "Aleeg"

Similar Moods

As you were reading undefined Shayari