सर्द मौसम में हवा तो नहीं माँगी जाती
छत टपकने पे घटा तो नहीं माँगी जाती
तू किसी और के कॉलर में सजा फूल है यार
तुझको पाने की दुआ तो नहीं माँगी जाती
जिसकी उर्यानी छुपाई हो अँधेरी शब ने
क्या करे वो कि ज़िया तो नहीं माँगी जाती
इस मुहब्बत में तिजारत नहीं होती मुझ सेे
दिल के बदले में वफ़ा तो नहीं माँगी जाती
उनको पुरखों की रिवायत पे है काटा जाता
बे-ज़बानों से रज़ा तो नहीं माँगी जाती
जब से मंसूब हुआ है तू किसी और के साथ
तेरे हाथों की हिना तो नहीं माँगी जाती
एक वो शख़्स मुक़द्दर में नहीं था कि 'बशर'
रब से कुछ और अता तो नहीं माँगी जाती
Read Full