रोई है अंदलीब हाए गुलाब
उसपे क्या-क्या सितम न ढाए गुलाब
ख़ार हूँ फिर भी मेरे बारे में
उसकी है एक एक राय गुलाब
इस से बढ़कर हो कौन ख़ुश-क़िस्मत
जो ख़िज़ाँ रुत में रह के पाए गुलाब
रंग सारे ही फीके पड़ गए अब
तितली को पास क्या बुलाए गुलाब
अव्वल अव्वल तो रोया मैं और वो
बाग़ के बाग़ अब रुलाए गुलाब
कैसी तरतीब से चमन उजड़ा
इस के बारे में क्या बताए गुलाब
है इजाज़त 'बशर' उसे वर्ना
कौन छू सकता है पराए गुलाब
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