जो हुस्न-ओ-मोहब्बत का तलबगार नहीं है
दुनिया में कोई ऐसा समझदार नहीं है
दुख है मैं मिलाता हूॅं मेरे यार को सब सेे
उस पर कि मेरा यार वफ़ादार नहीं है
जो 'इश्क़ में है उसको सज़ाऍं ही मिलेंगी
जो क़त्ल करेगा वो गुनहगार नहीं है
मैं आइने में उस को नहीं देख सकूँगा
वो जो मिरा क़ातिल है गिरफ़्तार नहीं है
हम वक़्त से भी तेज़ नहीं भाग सकेंगे
इस ज़िंदगी की इतनी भी रफ़्तार नहीं है
वो कार-ए-वफ़ा से ही मगर सच में मरेगा
वो बा-वफ़ा है कोई अदाकार नहीं है
ये ज़ख़्म-ए-तमन्ना है मेरी जान का दुश्मन
कोई भी दवा इस पे असरदार नहीं है
हैरत है यहाँ मेरा ख़सारा नहीं होता
इस शहर में क्यूँ हुस्न का बाज़ार नहीं है
वो तर्क-ए-तअल्लुक़ के मवाक़े नहीं देता
वो रिश्ता निभाने को भी तैयार नहीं है
अब उसके लिए 'इश्क़ बचा ही नहीं तुझ में
तू यार 'भुवन' इसलिए बीमार नहीं है
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