बन के रहना ही नहीं है मुझ को ख़ास आप का

लोग मुझ को कहने लग गए हैं दास आप का

आप बे-वफ़ा हैं ये किसी को याद भी नहीं
हर किसी को आ रहा है हुस्न रास आप का

अब तो मय-कदों में आशिक़ों के भी मुकाबले
नाम कुछ ज़ियादा लेते हैं गिलास आप का

चूमने लगा है जिस तरह रक़ीब आप को
देखना उतर ही जाएगा लिबास आप का

— Bhuwan Singh

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