कैसे दिखते हैं वो इंसान बता सकता हूॅं
बेवफ़ा लोगों की पहचान बता सकता हूॅं
ऐन मुमकिन है कि मैं फ़ाएदे भूला बैठूॅं
पर तुम्हें 'इश्क़ के नुक़सान बता सकता हूॅं
देखिए उन्स या चाहत या अक़ीदत या ''इश्क़
मौत के और भी सामान बता सकता हूॅं
पहले से दिल में मेरे लोग बहुत ठहरे हैं
इस सबब से तुझे मेहमान बता सकता हूॅं
कितना याद आएगा मुझको वो मेरा पहला ''इश्क़
दूसरे 'इश्क़ के दौरान बता सकता हूॅं
As you were reading Shayari by Bhuwan Singh
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