मत समझ मुस्कुराने चला हूँ
अपने दिल को दुखाने चला हूँ
थाम ले थाम ले जान ख़ुद को
दर्द दिल का सुनाने चला हूँ
तू समझ ले तरन्नुम में मेरी
आह को गुनगुनाने चला हूँ
'इश्क़ में अश्क का है मुक़द्दर
ये सदाक़त बताने चला हूँ
तूने इज़्ज़त भी नीलाम की है
अपना चेहरा छुपाने चला हूँ
तुझ से नफ़रत खुल-ए-आम करके
क़र्ज़ ख़ुद का चुकाने चला हूँ
'इश्क़ के रब्त से है तू जाहिल
'इश्क़ फिर भी सिखाने चला हूँ
तेरा दिल तो पिघलता नहीं है
बे-वजह मैं लुभाने चला हूँ
मेरा मन चाहता है तुझी को
अपने मन को मनाने चला हूँ
तंग हो कर मुहब्बत से मुर्शद
आग घर में लगाने चला हूँ
मैं तो ग़ाफ़िल हूँ लज़्ज़त से इसकी
इसलिए ज़हर खाने चला हूँ
मेरा ग़म काश हो जाए कम सो
मौत को आज़माने चला हूँ
ज़िंदा रहना है मुश्किल तेरे बिन
अपनी हस्ती मिटाने चला हूँ
'इश्क़ का ज़ख़्म कब तक छुपाऊँ
मैं तो सबको दिखाने चला हूँ
अब ज़रा याद उसकी दिला कर
तुझको 'दानिश' सताने चला हूँ
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