Meaning of

क़सीदे

qaside • قصیدے

स्तुतिगान; प्रशस्ति

odes; eulogies

قصیدے; مدح

Arabic

तुम्हारी शान में पढ़ता है दिल क़सीदे मेरा
तुम्हारे हुस्न का नज़रें तवाफ़ करती हैं

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इक ओर वो सलीक़े से काटे हैं सर मिरा
इक ओर मैं कसीदे पढूँ शान-ए-यार में

हरगिज़ नहीं बनाता मोहब्बत में हिज्र मैं
होता अगर बनाना मेरे इख़्तियार में

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तेरे हुस्न के क़सीदे पढ़ने पर ख़ुदा मज़बूर हुआ है
तेरे होने से ही ये शहर-ए-लखनऊ मशहूर हुआ है

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कहो क्या ज़ात क्या पहचान है इक मुर्शिद-ए-कामिल
बिना कण भर पढ़े मन भर क़सीदे सब को आते हैं

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कसीदे क्या पढूँ मैं हुस्न की ता'रीफ़ में उस के मियाँ तुम समझो बस इतना
नज़र-भर के अगर सूरज-मुखी भी उस को देखे तो उसी की ओर हो जाए

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तुम्हारी शान में पढ़ता है दिल क़सीदे मेरा
तुम्हारे हुस्न का नज़रें तवाफ़ करती हैं

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इक ओर वो सलीक़े से काटे हैं सर मिरा
इक ओर मैं कसीदे पढूँ शान-ए-यार में

हरगिज़ नहीं बनाता मोहब्बत में हिज्र मैं
होता अगर बनाना मेरे इख़्तियार में

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मूल रूप से, क़सीदे एक प्रकार की कविता होती है जो किसी शासक या महानुभाव की प्रशंसा में लिखी जाती है। कविता में यह शब्द भव्यता और औपचारिकता को दर्शाता है, जो श्रद्धा और प्रशंसा की भावना को जगाता है।

कवियों द्वारा क़सीदे का उपयोग गहरी प्रशंसा व्यक्त करने या अपने कविता के विषय को ऊँचा उठाने के लिए किया जाता है। यह अक्सर भव्यता और उत्सव के संदर्भों में प्रकट होता है, जो अधिक व्यक्तिगत या अंतरंग कविता के रूपों के विपरीत होता है।

क़सीदे में परंपरा का भार और औपचारिक प्रशंसा की शालीनता होती है। यह काव्यिक श्रद्धांजलि की स्थायी शक्ति का प्रमाण है।