Meaning of

क़ाफ़िया-पैमाई

qaafiya-paimaai • قافیہ پیمائی

क़ाफ़िया बनाने की कला; छंद रचना की कला

craft of rhyme; art of versification

قافیہ بنانے کا فن; نظم سازی کی فن

Persian

कर लूँ मैं अगर क़ाफ़िया-पैमाई ज़रा और
आ जाए ग़ज़ल में मिरी रानाई ज़रा और

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मैं भटकता ही रहा दश्त-ए-शनासाई में
कोई उतरा ही नहीं रूह की गहराई में

क्या मिलाया है बता जाम-ए-पज़ीराई में
ख़ूब नश्शा है तेरी हौसला-अफ़जाई में

तेरी यादों की सुई, प्रेम का धागा मेरा
काम आए हैं बहुत ज़ख़्मों की तुरपाई में

डस रही है ये सियह-रात की नागिन मुझ को
भर रही ज़हर-ए-ख़मोशी, रग-ए-तन्हाई में

सुर्मा-ए-मक्र-ओ-फ़रेब आँखों में जब से है लगा
तब से है ख़ूब इज़ाफ़ा हद-ए-बीनाई में

फ़िक्र-ओ-फ़न, रंग-ए-तग़ज़्ज़ुल, न ग़ज़ल की ख़ुशबू
बस लगा रहता हूँ मैं क़ाफ़िया-पैमाई में

सीख पानी से हुनर काम 'अनीस' आएगा
दौड़ कर ख़ुद ही चला आता है गहराई में

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वो काफ़िया-पैमाई करता है ग़ज़ल
लिखने की उस की इब्तिदाई है अभी

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कर लूँ मैं अगर क़ाफ़िया-पैमाई ज़रा और
आ जाए ग़ज़ल में मिरी रानाई ज़रा और

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मैं भटकता ही रहा दश्त-ए-शनासाई में
कोई उतरा ही नहीं रूह की गहराई में

क्या मिलाया है बता जाम-ए-पज़ीराई में
ख़ूब नश्शा है तेरी हौसला-अफ़जाई में

तेरी यादों की सुई, प्रेम का धागा मेरा
काम आए हैं बहुत ज़ख़्मों की तुरपाई में

डस रही है ये सियह-रात की नागिन मुझ को
भर रही ज़हर-ए-ख़मोशी, रग-ए-तन्हाई में

सुर्मा-ए-मक्र-ओ-फ़रेब आँखों में जब से है लगा
तब से है ख़ूब इज़ाफ़ा हद-ए-बीनाई में

फ़िक्र-ओ-फ़न, रंग-ए-तग़ज़्ज़ुल, न ग़ज़ल की ख़ुशबू
बस लगा रहता हूँ मैं क़ाफ़िया-पैमाई में

सीख पानी से हुनर काम 'अनीस' आएगा
दौड़ कर ख़ुद ही चला आता है गहराई में

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'क़ाफ़िया-पैमाई' शब्द कविता में तुक और लय बनाने की जटिल कला को संदर्भित करता है। इसमें ध्वनि और अर्थ का नाजुक संतुलन शामिल है, जहां प्रत्येक शब्द को उसकी संगीतात्मकता और कविता के समग्र सामंजस्य में उसके योगदान के लिए चुना जाता है। कविता में, यह शब्दों को एक मधुर गलीचे में बुनने में कवि की कौशल और रचनात्मकता को दर्शाता है।

कवि 'क़ाफ़िया-पैमाई' का उपयोग भाषा और रूप पर अपनी महारत का प्रदर्शन करने के लिए करते हैं। इसका उपयोग अक्सर कविता में एक संगीतात्मक गुण बनाने के लिए किया जाता है, जो भावनात्मक और सौंदर्य अनुभव को बढ़ाता है। यह शब्द अर्थ की बलि दिए बिना तुक और लय बनाए रखने की चुनौतियों को भी उजागर कर सकता है।

कविता में, 'क़ाफ़िया-पैमाई' कवि की कला का प्रमाण है। यह ध्वनि और अर्थ के सामंजस्य का जश्न मनाता है, जहां प्रत्येक शब्द अपनी भूमिका गाता है।