Meaning of

क़ाबू

qaabu • قابو

नियंत्रण; संयम; अधिकार

control; restraint; mastery

کنٹرول; ضبط; مہارت

Arabic

दिल पे जो क़ाबू हो जाए
तन मन फिर साधू हो जाए

दोबारा तू लौट के आए
ऐसा इक जादू हो जाए

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इस दौर में इंसान का चेहरा नहीं मिलता
कब से मैं नक़ाबों की तहें खोल रहा हूँ

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सुब्ह तक हिज्र में क्या जानिए क्या होता है
शाम ही से मिरे क़ाबू में नहीं दिल मेरा

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अब तो होने से रहा जज़्बात पे क़ाबू
एक बुलबुल ने कहा है बाज को बाबू

घर से निकले हैं मगर राहें नहीं देखीं
पत्थरों में ढूँढ़ते फिरते हैं जो आबू

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केवल हवस और बस हवस हो तू न हो
तू वासना में इतना बेक़ाबू न हो

मुझ को तुझे ऐसी जगह है चूमना
जिस सेे तेरा फिर ख़ुद पे भी क़ाबू न हो

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बात आगे बढ़ चुकी है बस ज़रा सी बात पर
उँगलियाँ उठने लगी हैं अब हमारी ज़ात पर

अपनी मर्ज़ी के मुताबिक़ ही तुम्हें करता हूँ याद
मैं ने क़ाबू पा लिया है नफ़्स पर जज़्बात पर

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तेरे इन नकाबों में दुनिया बसी है
मेरी चाहतों में तो बस बेबसी है

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कहाँ ख़ुद पे फिर मेरा क़ाबू चलेगा
वो आवाज सुनली तो जादू चलेगा

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कर ही लेता है वो अपने काबू में
इश्क़ को बीमार दिखना चाहिए

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लगाना ज़र्ब जब दिल पर तो ज़ालिम याद ये रखना
इसी दिल में तुम्हारी ज़ात की तौक़ीर होती है

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दिल पे जो क़ाबू हो जाए
तन मन फिर साधू हो जाए

दोबारा तू लौट के आए
ऐसा इक जादू हो जाए

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इस दौर में इंसान का चेहरा नहीं मिलता
कब से मैं नक़ाबों की तहें खोल रहा हूँ

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अपने मूल अर्थ में, 'क़ाबू' किसी चीज़ को अधिकारपूर्वक थामने या प्रबंधित करने की क्षमता को दर्शाता है। कविता में, यह अक्सर इच्छा और अनुशासन के बीच संघर्ष, स्वतंत्रता और नियंत्रण के बीच तनाव को उजागर करता है।

कवि 'क़ाबू' का उपयोग आत्म-नियंत्रण और हृदय के आंतरिक संघर्षों के विषयों को खोजने के लिए करते हैं। यह उन शब्दों के विपरीत है जो अराजकता या संयम की कमी का सुझाव देते हैं।

कविता के क्षेत्र में, 'क़ाबू' हृदय और मस्तिष्क के बीच नाजुक संतुलन को प्रतिबिंबित करने वाला दर्पण बन जाता है।