Meaning of

क़ायनात

qaaynaat • انمیں

ब्रह्मांड; सृष्टि

universe; cosmos

کائنات; کسموس

Arabic

ये जुदाई तो एक रात की है
फ़िक्र मुझ को मेरी हयात की है

लोग मतलब से याद करते हैं
'सैफ़' ये रस्म क़ायनात की है

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मुझे पहले पहल लगता था ज़ाती मसअला है
मैं फिर समझा मोहब्बत क़ायनाती मसअला है

परिंदे क़ैद हैं तुम चहचहाहट चाहते हो
तुम्हें तो अच्छा ख़ासा नफ़सियाती मसअला है

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साग़र-ए-मय नहीं है हाथों में
हाथ में क़ायनात है साक़ी

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यहाँ हर एक शख़्स में बसर है हब्स-ए-क़ायनात
जिसे भी देखो वो यहाँ ख़ला का इक दयार है

कभी मिलेंगे मोड़ पर यहीं जहाँ खड़ा हूँ मैं
ये इब्तिदा का दौर है अभी तुझे ख़ुमार है

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पहले तो मेरे साथ बनाता रहा उसे
फिर सारी क़ायनात उठा कर वो ले गया

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ये जुदाई तो एक रात की है
फ़िक्र मुझ को मेरी हयात की है

लोग मतलब से याद करते हैं
'सैफ़' ये रस्म क़ायनात की है

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मुझे पहले पहल लगता था ज़ाती मसअला है
मैं फिर समझा मोहब्बत क़ायनाती मसअला है

परिंदे क़ैद हैं तुम चहचहाहट चाहते हो
तुम्हें तो अच्छा ख़ासा नफ़सियाती मसअला है

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'क़ायनात' शब्द ब्रह्मांड की विशालता और रहस्य को उजागर करता है। कविता में, यह अक्सर अनंत और अज्ञात का प्रतीक होता है, जो मानव भावनाओं और अस्तित्ववादी चिंतन के लिए एक कैनवास है।

'क़ायनात' का उपयोग कवि अनंतता और उसमें मानव के स्थान की खोज के लिए करते हैं। यह अज्ञात की सुंदरता और भय, सितारों के शाश्वत नृत्य, या ब्रह्मांड की मौनता को प्रतिबिंबित कर सकता है।

'क़ायनात' की विशालता में, कवि सांत्वना और चुनौती दोनों पाते हैं। यह हमारी क्षुद्रता और आश्चर्य की क्षमता की याद दिलाता है।