Meaning of

क़ुसूर

qusoor • قصور

त्रुटि; गलती; पाप

fault; mistake; sin

قصور; غلطی; گناہ

Arabic

तेरी आँखों का कुछ क़ुसूर नहीं हाँ मुझी को ख़राब होना था — Jigar Moradabadi
उसी का शहर वही मुद्दई वही मुंसिफ़ हमें यक़ीं था हमारा क़ुसूर निकलेगा — Ameer Qazalbash
क़ुसूर हो तो हमारे हिसाब में लिख जाए मोहब्बतों में जो एहसान हो तुम्हारा हो — Parveen Shakir
मेरी जाने जाँ ये तेरे चेहरे पे जो नूर है जान मेरी सब दु'आओं का ही ये क़ुसूर है — Danish Balliavi
ले कर ख़ुदा का नाम जो इक बे-क़ुसूर को शैतान कह रहा है ये शैतान कौन है — nakul kumar
उसी का शहर वही मुद्दई वही मुंसिफ़ हमें यक़ीं था हमारा क़ुसूर निकलेगा — Ameer Qazalbash
गर मानते हैं आप भी मुझ को कसूरवार मेरे खिलाफ़ आप भी पत्थर उठाइए — Ashraf Ali
गुनहगार तो पहुंच से बहुत दूर थे सज़ा उन्हें मिली जो बेकुसूर थे — Anurag Ravi
साथ छोड़ा तुम ने तो क़ुसूर मेरा ही तो है पेड़ सूख जाए तो परिंदे मिलते ही नहीं — Yogamber Agri

क़ुसूर, अपने मूल में, एक त्रुटि या गलती को दर्शाता है। कविता के क्षेत्र में, यह अक्सर मानवीय त्रुटि के नैतिक और भावनात्मक आयामों में गहराई से उतरता है, अपराधबोध, मोचन, और क्षमा की खोज के विषयों की खोज करता है।

कवि 'क़ुसूर' का उपयोग अपराधबोध के भार और मोचन की लालसा की खोज के लिए करते हैं। यह व्यक्तिगत विफलताओं पर एक प्रतिबिंब या सामाजिक खामियों पर एक व्यापक टिप्पणी हो सकता है। अक्सर क्षमा और समझ के विषयों के साथ जोड़ा जाता है।

क़ुसूर हमारी साझा मानवता की याद दिलाता है, हमें समझ और करुणा की खोज करने के लिए प्रेरित करता है। यह त्रुटि से प्रबोधन की यात्रा है।