Meaning of

ज़ह्र

zahr • شَو

ज़हर; विष; कड़वाहट

poison; venom; bitterness

زہر; تلخی

Arabic

मैं भटकता ही रहा दश्त-ए-शनासाई में कोई उतरा ही नहीं रूह की गहराई में क्या मिलाया है बता जाम-ए-पज़ीराई में ख़ूब नश्शा है तेरी हौसला-अफ़जाई में तेरी यादों की सुई, प्रेम का धागा मेरा काम आए हैं बहुत ज़ख़्मों की तुरपाई में डस रही है ये सियह-रात की नागिन मुझ को भर रही ज़हर-ए-ख़मोशी, रग-ए-तन्हाई में सुर्मा-ए-मक्र-ओ-फ़रेब आँखों में जब से है लगा तब से है ख़ूब इज़ाफ़ा हद-ए-बीनाई में फ़िक्र-ओ-फ़न, रंग-ए-तग़ज़्ज़ुल, न ग़ज़ल की ख़ुशबू बस लगा रहता हूँ मैं क़ाफ़िया-पैमाई में सीख पानी से हुनर काम 'अनीस' आएगा दौड़ कर ख़ुद ही चला आता है गहराई में — Anis shah anis
क़ौल-ए-नबी है जो रखे ज़हरा से दुश्मनी रू-ए-ज़मीं पे चलना भी उस का हराम है — Almas Rizvi
ज़िंदगी रोज़ डस रही है मुझे एक ज़हरीले साँप के मानिंद — Shajar Abbas
मेरी क़िस्मत के क्या कहने, बदन से नाग लिपटा है ये काला नाग ज़हरीला सा, इस को इश्क़ कहते हैं — Pritesh Bunker
ज़हर तो पूरा का पूरा पी लिए थे आप भोले फिर भला ये आदमी क्या खा के ज़हरीला हुआ है — Manmauji
हमें क्या क्या न बोला जा रहा है हवा में ज़ह्र घोला जा रहा है — Saarthi Baidyanath
हो जिस के साथ मेरा अग्द ऐ मेरे मालिक दुआ है तुझ सेे वो लड़की कनीज़-ए-ज़हरा हो — Shajar Abbas

ज़ह्र शब्द में खतरे और नुकसान की भावना होती है, जो अक्सर ज़हर की घातकता से जुड़ी होती है। कविता में, यह शारीरिक से परे जाकर भावनात्मक और आध्यात्मिक विषाक्तता को भी दर्शाता है, कड़वाहट और विश्वासघात के सार को पकड़ता है।

कवि अक्सर 'ज़ह्र' का उपयोग शब्दों और भावनाओं की विनाशकारी शक्ति को दर्शाने के लिए करते हैं। यह संबंधों में छिपे खतरों या अनकही नाराजगी की संक्षारक प्रकृति का प्रतीक हो सकता है।

कविता की दुनिया में, 'ज़ह्र' अदृश्य और अनकहे के लिए एक शक्तिशाली रूपक के रूप में कार्य करता है, जीवन के ताने-बाने को खोलने वाली मौन शक्तियों की याद दिलाता है।