Meaning of

ज़ार-ज़ार

zaar-zaar • زار زار

फूट-फूट कर रोना; गहरे दुःख में विलाप

weeping profusely; lamenting deeply

پھوٹ پھوٹ کر رونا; گہرے دکھ میں ماتم

Persian

पैदा वो बात कर कि तुझे रोएँ दूसरे रोना ख़ुद अपने हाल पे ये ज़ार ज़ार क्या — Mirza Mohammad Hadi Aziz Lakhnavi
ज़िंदगी फ़क़त हँसते-हँसते तो नहीं कटती कितना भी छुपाओ तुम अश्क आ ही जाते हैं — Rachit Sonkar
ऐ जाने वाले ख़्वाब में आओ न बार-बार तुम को जो देखता हूँ मैं रोता हूँ ज़ार-ज़ार — Shayan Ahmad
जब याद आते संग बिताए वो लम्हें सो तब ज़ार-ज़ार अश्कों की बरसात होती है — Sandeep dabral 'sendy'
पहले हँसते-हँसते बातें करते थे अब जो बातें करते-करते रोते हैं — Shreya Shivmurti
पहले सानी मिसरा लिख्खो फिर ऊला बाँधा जाएगा ग़म हँसते-हँसते सहलो तो ग़म रोता-रोता जाएगा — Lokesh Vashishtha

यह शब्द अत्यधिक दुःख का भाव उत्पन्न करता है, जहाँ आँसू बेख़ौफ़ बहते हैं। कविता में, यह मानवीय दुःख की गहराई को पकड़ता है, ऐसा दुःख जो व्यक्ति को सांत्वना से परे और अपने दर्द की दुनिया में खो देता है।

कवि इसे अक्सर गहन शोक या व्यक्तिगत क्षति के दृश्यों को चित्रित करने के लिए उपयोग करते हैं। यह शांत दुःख के विपरीत है, कच्ची, बिना छाने भावनाओं को उजागर करता है।

ज़ार-ज़ार दुःख के कैथार्सिस को मूर्त रूप देता है, गहरी भावना के लिए मानवीय क्षमता का प्रमाण है।