गर्मी की सुब्ह-सुब्ह की ठंडी हवा हो तुमइस लू लगे मरीज़ की जाना शिफ़ा हो तुमजिस को में हँसते-हँसते करूँ शौक़ से क़ुबूलऐसे ही एक जुर्म की प्यारी सज़ा हो तुम— Dipanshu Shams