Meaning of

जुनूँ

junoon • جنوں

पागलपन; जुनून; उन्माद

madness; passion; frenzy

پاگل پن; جنون; دیوانگی

Arabic

ऐ इश्क़-ए-जुनूँ-पेशा हाँ इश्क़-ए-जुनूँ-पेशा
आज एक सितमगर को हँस हँस के रुलाना है

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तेरी गली को छोड़ के पागल नहीं गया
रस्सी तो जल गई है मगर बल नहीं गया

मजनूँ की तरह छोड़ा नहीं मैं ने शहर को
या'नी मैं हिज्र काटने जंगल नहीं गया

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मेरी अक्ल-ओ-होश की सब हालतें
तुम ने साँचे में जुनूँ के ढाल दी

कर लिया था मैं ने अहद-ए-तर्क-ए-इश्क़
तुम ने फिर बाँहें गले में डाल दी

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इश्क़ की इक रंगीन सदा पर बरसे रंग
रंग हो मजनूँ और लैला पर बरसे रंग

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मेरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा
इसी सियाह समुंदर से नूर निकलेगा

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करे जो क़ैद जुनूँ को वो जाल मत देना
हो जिस
में होश उसे ऐसा हाल मत देना

जो मुझ सेे मिलने का तुम को कभी ख़याल आए
तो इस ख़याल को तुम कल पे टाल मत देना

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तेरे बग़ैर ख़ुदा की क़सम सुकून नहीं
सफ़ेद बाल हुए हैं हमारा ख़ून नहीं

न हम ही लौंडे लपाड़ी न कच्ची उम्र का वो
ये सोचा समझा हुआ इश्क़ है जुनून नहीं

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ऐ मिरी ज़ात के सुकूँ आ जा
थम न जाए कहीं जुनूँ आ जा

इस से पहले कि मैं अज़िय्यत में
अपनी आँखों को नोच लूँ आ जा

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दश्त छोड़े हुए अब तो अर्सा हुआ
मैं हूँ मजनूँ मगर नाम बदला हुआ

मुझ को औरत के दुख भी पता हैं कि मैं
एक लड़का हूँ बेवा का पाला हुआ

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सियाह रात की सरहद के पार ले गया है
अजीब ख़्वाब था आँखें उतार ले गया है

है अब जो ख़ल्क़ में मजनूँ के नाम से मशहूर
वो मेरी ज़ात से वहशत उधार ले गया है

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ऐ इश्क़-ए-जुनूँ-पेशा हाँ इश्क़-ए-जुनूँ-पेशा
आज एक सितमगर को हँस हँस के रुलाना है

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तेरी गली को छोड़ के पागल नहीं गया
रस्सी तो जल गई है मगर बल नहीं गया

मजनूँ की तरह छोड़ा नहीं मैं ने शहर को
या'नी मैं हिज्र काटने जंगल नहीं गया

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'जुनूँ' शब्द एक तीव्र और प्रबल भावना को दर्शाता है, जो अक्सर प्रेम या महत्वाकांक्षा से जुड़ी होती है। यह एक ऐसी मानसिक स्थिति का सुझाव देता है जहाँ तर्क उत्साह से ढक जाता है, जिससे गहरी इच्छाओं द्वारा संचालित कार्य होते हैं। कविता में, यह हृदय की गहरी भावनाओं की उथल-पुथल को पकड़ता है।

कवि 'जुनूँ' का उपयोग मानव भावनाओं की चरम सीमाओं का पता लगाने के लिए करते हैं। यह उन छंदों में प्रकट होता है जो प्रेम की अराजकता या महत्वाकांक्षा के उत्साह में गहराई से जाते हैं। यह शब्द जुनून और पागलपन के बीच की महीन रेखा को भी उजागर कर सकता है, तीव्र भावनाओं की खपत प्रकृति को दर्शाता है।

अपने काव्यात्मक रूप में, 'जुनूँ' मानव आत्मा की असीम ऊर्जा का प्रमाण है, अनियंत्रित जुनून की शक्ति और खतरे की याद दिलाता है।