Meaning of

मकर-ओ-फ़रेब

makar-o-fareb • مکر و فریب

धोखा और चालाकी; कपट और छल

deceit and trickery; cunning and fraud

دھوکہ اور چالاکی; مکاری اور فریب

Arabic

मैं भटकता ही रहा दश्त-ए-शनासाई में कोई उतरा ही नहीं रूह की गहराई में क्या मिलाया है बता जाम-ए-पज़ीराई में ख़ूब नश्शा है तेरी हौसला-अफ़जाई में तेरी यादों की सुई, प्रेम का धागा मेरा काम आए हैं बहुत ज़ख़्मों की तुरपाई में डस रही है ये सियह-रात की नागिन मुझ को भर रही ज़हर-ए-ख़मोशी, रग-ए-तन्हाई में सुर्मा-ए-मक्र-ओ-फ़रेब आँखों में जब से है लगा तब से है ख़ूब इज़ाफ़ा हद-ए-बीनाई में फ़िक्र-ओ-फ़न, रंग-ए-तग़ज़्ज़ुल, न ग़ज़ल की ख़ुशबू बस लगा रहता हूँ मैं क़ाफ़िया-पैमाई में सीख पानी से हुनर काम 'अनीस' आएगा दौड़ कर ख़ुद ही चला आता है गहराई में — Anis shah anis
अपनी हयात काट के मक्र-ओ-फ़रेब में बच्चों से कह रहे हैं बुरे काम मत करो — Shajar Abbas

मकर-ओ-फ़रेब मानव स्वभाव के अंधेरे पहलुओं की बात करता है, जहाँ धोखा और चालाकी खेल में होते हैं। कविता में, यह अक्सर नैतिक संघर्षों और छायादार रास्तों को उजागर करता है जिन पर कोई चल सकता है।

कवि इसे विश्वासघात और नैतिक अस्पष्टता के विषयों का पता लगाने के लिए उपयोग करते हैं। यह ईमानदारी और अखंडता के विपरीत है, जो मानव अंतःक्रियाओं की जटिलताओं में एक झलक प्रदान करता है।

मकर-ओ-फ़रेब मानव आत्मा के भीतर छायाओं के जटिल नृत्य को प्रकट करता है।