Meaning of

मक़्तल

maqtal • مقتل

फांसी का स्थान; युद्धभूमि

place of execution; battlefield

پھانسی کی جگہ; میدان جنگ

Arabic

इश्क़ के मक़्तल चलो ज़ख़्म-ए-जिगर को देखते हैं
लोग बाज़ीगर के कैसे अब हुनर को देखते हैं

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यार इक बार परिंदों को हुकूमत दे दो
ये किसी शहर को मक़्तल नहीं होने देंगे

ये जो चेहरे हैं यहाँ चाँद से चेहरे 'ताबिश'
ये मिरा इश्क़ मुकम्मल नहीं होने देंगे

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कभी उस को हम अपनी रूह का पैकर समझते थे
बहुत नादान थे मक़्तल को अपना घर समझते थे

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मक़तल-ए-शौक़ के आदाब निराले हैं बहुत
दिल भी क़ातिल को दिया करते हैं सर से पहले

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कम अज़ कम इक ज़माना चाहता हूँ
कि तुम को भूल जाना चाहता हूँ

ख़ुदारा मुझ को तन्हा छोड़ दीजे
मैं खुल कर मुस्कुराना चाहता हूँ

सरासर आप हूँ मद्दे मुक़ाबिल
ख़ुदी ख़ुद को हराना चाहता हूँ

मेरे हक़ में उरूस-ए-शब है मक़्तल
सो उस से लब मिलाना चाहता हूँ

ये आलम है, कि अपने ही लहू में
सरासर डूब जाना चाहता हूँ

सुना है तोड़ते हो दिल सभों का
सो तुम से दिल लगाना चाहता हूँ

उसी बज़्म-ए-तरब की आरज़ू है
वही मंज़र पुराना चाहता हूँ

नज़र से तीर फैंको हो, सो मैं भी
जिगर पर तीर खाना चाहता हूँ

चराग़ों को पयाम-ए-ख़ामुशी दे
तेरे नज़दीक आना चाहता हूँ

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सू-ए-मक़्तल मियाँ सर-ब-कफ़ कौन है?
हम हैं बातिल तो हक़ की तरफ़ कौन है?

तीर अग़्यार पर नज़रें इस यार पर
अब बताओ कि उस का हदफ़ कौन है?

✍सलमान यूसुफ़

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एक वो रात थी जब मैं तन्हा मक़्तल मक़्तल घूमा था
एक ये रात कि मैं इक चारा-गर से मिलने आया हूँ

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गर हराना है तो मक़्तल में हराया जाए
सब के आगे तो मुझे सर पे बिठाया जाए

फेंक देना ये बदन को तू हवस के आगे
पर बदन पहले मिरा लाश बनाया जाए

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चला है जोश में मक़्तल की ओर जोशीला
उसी को देख के कितनों को अक़्ल आई है

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फिर से मक़्तल में बहाएा है लहू क़ातिल का
फिर ये उम्मीद है अब कोई न मारा जाए

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इश्क़ के मक़्तल चलो ज़ख़्म-ए-जिगर को देखते हैं
लोग बाज़ीगर के कैसे अब हुनर को देखते हैं

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यार इक बार परिंदों को हुकूमत दे दो
ये किसी शहर को मक़्तल नहीं होने देंगे

ये जो चेहरे हैं यहाँ चाँद से चेहरे 'ताबिश'
ये मिरा इश्क़ मुकम्मल नहीं होने देंगे

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'मक़्तल' शब्द मूल रूप से उस स्थान को संदर्भित करता है जहाँ फांसी दी जाती है, लेकिन कविता में, यह अक्सर जीवन के युद्धक्षेत्र का प्रतीक होता है जहाँ संघर्ष और बलिदान होते हैं। यह गंभीरता और गहनता की भावना को जागृत करता है।

कवि 'मक़्तल' का उपयोग बलिदान, संघर्ष और उस अनिवार्य भाग्य के विषयों को व्यक्त करने के लिए करते हैं जो सभी का इंतजार करता है। यह अक्सर भाग्य के साथ अंतिम टकराव के लिए एक रूपक के रूप में कार्य करता है।

कविता के क्षेत्र में, 'मक़्तल' भाग्य के गंभीर नृत्य और जीवन के ताने-बाने में अंकित बलिदानों को दर्शाता है।