Meaning of

मक़्ता

maqta • مقطع

अंतिम शेर; निष्कर्ष; हस्ताक्षर

final couplet; conclusion; signature

آخری شعر; نتیجہ; دستخط

Arabic

किताब-ए-इश्क़ में हर आह एक आयत है पर आँसुओं को हुरूफ़‌‌‌‌-ए-मुक़त्तिआ'त समझ — Umair Najmi
कभी उस को हम अपनी रूह का पैकर समझते थे बहुत नादान थे मक़्तल को अपना घर समझते थे — Haider Khan
क्यूँ आ जाते हो सीधे मक़्ते पर पहले थोड़ा काम करो मतले पर — Saahir
एक वो रात थी जब मैं तन्हा मक़्तल मक़्तल घूमा था एक ये रात कि मैं इक चारा-गर से मिलने आया हूँ — Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
मक़तल-ए-शौक़ के आदाब निराले हैं बहुत दिल भी क़ातिल को दिया करते हैं सर से पहले — Ali Sardar Jafri
मैं हूँ तुम हो तुम हो मैं हूँ दुनिया से क्या नाता है गीत ग़ज़ल के हर मक़्ते में नाम तुम्हारा आता है — Krishnavat Ritesh

ग़ज़ल की दुनिया में, मक़्ता एक अंतिमता और व्यक्तिगत स्पर्श का स्थान रखता है। यह कवि का हस्ताक्षर होता है, जहाँ कवि अक्सर अपना तख़ल्लुस प्रकट करता है या कोई व्यक्तिगत भावना व्यक्त करता है। यह शेर कविता को समापन और पहचान के साथ लपेटता है।

कवि मक़्ता का उपयोग एक स्थायी छाप छोड़ने के लिए करते हैं। यह अक्सर चिंतनशील होता है, कभी-कभी चंचल, और हमेशा व्यक्तिगत। मक़्ता कविता के बाकी हिस्सों के विपरीत हो सकता है या एक आश्चर्यजनक मोड़ ला सकता है।

मक़्ता वह जगह है जहाँ कवि की आवाज़ सबसे अंतरंग हो जाती है। यह दिल का हस्ताक्षर है।