Meaning of

मकीं

makeen • جلوے

निवासी; रहने वाला; बाशिंदा

dweller; resident; inhabitant

رہائشی; مکین; باسی

Arabic

थे जो बातिल फ़लक पर मकीं हो गए
हक़ लिए मैं ज़मीं पर टहलता रहा

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मकीन-ए-दिल को ख़ानुमा-ख़राबियों से इश्क़ था
क़याम ढूँढ़ता रहा तुम्हारी छत के बा'द भी

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जिस को देखा नहीं कई दिन से
वो है दिल में मकीं कई दिन से

ख़ुश्क दरिया से मुझ को याद आया
मैं भी रोया नहीं कई दिन से

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नमकीं गोया कबाब हैं फीके शराब के
बोसा है तुझ लबाँ का मज़े-दार चटपटा

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तुम ने बस बाज़ार में जलवे देखे हैं
हम ने भीड़ में खोते बच्चे देखे हैं

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मोहब्बत आबगीनों में हसीनों नाज़नीनों में
बड़ी वहशत सी होती है दिलों के इन मकीनों में

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ये जानते हैं ठीक नहीं माँग रहे हैं
हम एक खंडहर को मकीं माँग रहे हैं

सब माँग रहे हैं ख़ुदा से तेरा जिस्म और
हम हैं, कि फ़क़त तेरी जबीं माँग रहे हैं

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मैं जलवे आप को अपने हुनर के तो दिखाऊँगा
मगर कह के नहीं अब कुछ मैं कर के तो दिखाऊँगा

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मकीं सारे मकाँ के चले गए कब के
फ़क़त मैं हूँ यहाँ और ये सुकूत तारी है

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कुल इब्न-ए-आदम उन पे क़ुर्बान हो न जाएँ
तौबा वो उन के जलवे अल्लाह वो नज़ारे

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थे जो बातिल फ़लक पर मकीं हो गए
हक़ लिए मैं ज़मीं पर टहलता रहा

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मकीन-ए-दिल को ख़ानुमा-ख़राबियों से इश्क़ था
क़याम ढूँढ़ता रहा तुम्हारी छत के बा'द भी

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मकीं शब्द एक स्थायी निवास और अपनापन का भाव उत्पन्न करता है। कविता में, यह अक्सर दिल के निवास का प्रतीक होता है, जहाँ भावनाएँ बसती हैं और सुकून पाती हैं। यह आराम और परिचय का स्थान सुझाता है, जहाँ व्यक्ति वास्तव में घर जैसा महसूस करता है।

कवि अक्सर 'मकीं' का उपयोग दिल को प्रेम और लालसा के निवास स्थान के रूप में वर्णित करने के लिए करते हैं। यह दुनिया की क्षणभंगुर प्रकृति के विपरीत, भावनाओं के शाश्वत पहलू को उजागर करता है। यह प्रियतम को आत्मा के अंतिम निवास के रूप में भी चित्रित कर सकता है।

काव्यिक क्षेत्र में, 'मकीं' हृदय के शाश्वत आश्रय का प्रतीक है। यह वह स्थान है जहाँ आत्मा अपना सच्चा घर पाती है।