Meaning of

मक्कारी

makkaari • مکاری

धोखा; चालाकी; कपट

deceit; cunning; craftiness

فریب; چالاکی; مکاری

Arabic

मक्कारी नहीं है ये अदाकारी है मेरी
अनपढ़ हूँ मगर नौकरी सरकारी है मेरी

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ये दाढ़ियाँ ये तिलकधारियाँ नहीं चलतीं
हमारे अहद में मक्कारियाँ नहीं चलतीं

क़बीले वालों के दिल जोड़िए मेरे सरदार
सरों को काट के सरदारियाँ नहीं चलतीं

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आख़िर कैसे ये लोग है कैसी ये मक्कारी करते है
माँ पर लिखने वाले ही अब माँ से गद्दारी करते है

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वफ़ादारों की वफ़ादारियों से डर गया हूँ
मैं अपने लोगों की मक्कारियों से डर गया हूँ

ज़माने भर में मचे बेतहाशा शोर के बीच
दिल-ए-तन्हा तेरी लाचारियों से डर गया हूँ

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हमारे वास्ते दिल में मोहब्बत गर नहीं तेरे
बता कर एक सच हम को भले बर्बाद कर लेना

ज़रा कुछ देर तो ठहरो अभी साँसें मेरी चलतीं
मोहब्बत जिस सेे करते हो हमारे बा'द कर लेना

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झूठ मक्कारी फ़रेबी और जाने क्या से क्या
आज  कल  इंसान में बाकी  यही  दस्तूर  है

भूल कर अपनी हदें ख़ुद को समझते हैं ख़ुदा
आदमी  को  आदमी   रहना  कहाँ  मंज़ूर  है

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इन की आदत फ़रेब ओ मक्कारी
ज़िक्र ही क्यूँ करें हसीनों का

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मक्कारी नहीं है ये अदाकारी है मेरी
अनपढ़ हूँ मगर नौकरी सरकारी है मेरी

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ये दाढ़ियाँ ये तिलकधारियाँ नहीं चलतीं
हमारे अहद में मक्कारियाँ नहीं चलतीं

क़बीले वालों के दिल जोड़िए मेरे सरदार
सरों को काट के सरदारियाँ नहीं चलतीं

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'मक्कारी' शब्द चालाकी और धोखे की भावना को दर्शाता है। कविता में, यह मानव स्वभाव की द्वैतता को दर्शाता है, जहाँ बाहरी दिखावे धोखा दे सकते हैं और इरादे छिपे हो सकते हैं।

'मक्कारी' का उपयोग कवि विश्वासघात और छिपे हुए इरादों की थीम को खोजने के लिए करते हैं। यह मासूमियत और पवित्रता के विपरीत होता है, अक्सर रिश्तों की जटिलता को उजागर करता है।

'मक्कारी' मुस्कानों के पीछे छिपे सायों को उजागर करती है, विश्वास और धोखे के बीच जटिल नृत्य की याद दिलाती है।