Meaning of

मक्र

makr • مکر

धोखा; चालाकी; छल

deceit; cunning; trickery

دھوکہ; چالاکی; فریب

Arabic

तुम अपने क़ौल से मुकरोगी तो नहीं जानाँ हमारे सामने जब ख़ानदान आएँगे — Siraj Faisal Khan
हम नहीं वो जो करें ख़ून का दावा तुझ पर बल्कि पूछेगा ख़ुदा भी तो मुकर जाएँगे — Sheikh Ibrahim Zauq
नबील' ऐसा करो तुम भी भूल जाओ उसे वो शख़्स अपनी हर इक बात से मुकर चुका है — Aziz Nabeel
नाम आया है तेरा जब से गुनहगारों में सब गवाह अपनी गवाही से मुकरना चाहें — Swapnil Tiwari
वो गुलाबी पंखुरी थी बाग की और मैं मकरन्द लेने आ गया — Divy Kamaldhwaj
सियासतदार थे वो यार फ़ितरत थी मुकर जाना कि पागल थे लगा बैठे वफ़ा की आरज़ू उन सेे — ATUL SINGH
मैं भटकता ही रहा दश्त-ए-शनासाई में कोई उतरा ही नहीं रूह की गहराई में क्या मिलाया है बता जाम-ए-पज़ीराई में ख़ूब नश्शा है तेरी हौसला-अफ़जाई में तेरी यादों की सुई, प्रेम का धागा मेरा काम आए हैं बहुत ज़ख़्मों की तुरपाई में डस रही है ये सियह-रात की नागिन मुझ को भर रही ज़हर-ए-ख़मोशी, रग-ए-तन्हाई में सुर्मा-ए-मक्र-ओ-फ़रेब आँखों में जब से है लगा तब से है ख़ूब इज़ाफ़ा हद-ए-बीनाई में फ़िक्र-ओ-फ़न, रंग-ए-तग़ज़्ज़ुल, न ग़ज़ल की ख़ुशबू बस लगा रहता हूँ मैं क़ाफ़िया-पैमाई में सीख पानी से हुनर काम 'अनीस' आएगा दौड़ कर ख़ुद ही चला आता है गहराई में — Anis shah anis
एक और वा'दा उस ने किया मोहब्बत का पिछले साल भी ऐसे वादे से वो मुकरी थी — Pritam sihag

मक्र धोखे और चालाकी का भार लिए होता है, अक्सर भाग्य या व्यक्तियों की चालाकी भरी चालों का वर्णन करने के लिए उपयोग होता है। कविता में, यह एक छिपे हुए जाल की छवि को उभारता है, एक ऐसा जाल जो कुशलता से बिछाया गया हो। इस शब्द का सार इसके धोखे की कला और फंसे हुए लोगों की असहायता को व्यक्त करने की क्षमता में है।

कवि अक्सर मक्र का उपयोग विश्वासघात और मानव स्वभाव की छिपी जटिलताओं की खोज के लिए करते हैं। यह प्रेमी की चालाकी या भाग्य की अप्रत्याशित मोड़ों को चित्रित कर सकता है। यह शब्द सच्चाई के विपरीत है, सत्य और भ्रम के बीच के तनाव को उजागर करता है।

मक्र छायाओं का नृत्य है, जहाँ सत्य और भ्रम एक नाजुक संतुलन में नृत्य करते हैं।