
मुझे ही चाहता है मुद्दतों से वरना फिर
रक़ीब तक के तिरे हम मुकरने वाले थे
ये उस का घर है यहीं पे कहीं पे यारों सो
नहीं तो शहर से कब के निकलने वाले थे
— Manish Yadav
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