
मिरे घर क्यूँँ ले आते हो गली बाज़ार की बातें
चिढ़ाती हैं मुझे झूठे बिके अख़बार की बातें
मुकरता है हमेशा तू किए वादे निभाने से
तेरे वादे तिरी क़स
में हुईं सरकार की बातें
— Rohit Gustakh
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