Rohit Gustakh

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Rohit Gustakh shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Rohit Gustakh's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Shayari
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  • Sher(55)
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Sher

ग़म-ए-दुनिया से आगे कुछ नहीं है जहाँ तुम आशनाई कर रही हो — Rohit Gustakh
ये भी मशहूर था कूचे में उस के जिसे तुम लोग पागल कह रहे हो — Rohit Gustakh
बिना बात के हम लड़े जा रहे हैं कि नज़दीक आने मरे जा रहे हैं — Rohit Gustakh
हमारे लिए बे-वफ़ा है वो लड़की तुम्हारे लिए जो अभी देवता है — Rohit Gustakh
जब उन को बाहें फैलाए देखा तो याद हमें आई सावन के झूलों की — Rohit Gustakh
तुम्हें अब क्या बताएँ क्या किया हम ने दुआ देकर उसे जाने दिया हम ने — Rohit Gustakh
किसी ने कह दिया जंगल बनेगा परिंदे घर बनाते फिर रहे हैं — Rohit Gustakh
उतर आओ धरा पर अब तो गंगे कमी क्या है भगीरथ की लगन में — Rohit Gustakh
इशारे में उस ने कहा मुस्कुरा कर इशारे से तुम को इशारा करेंगे — Rohit Gustakh
तुम्हारी बज़्म हैं तो क्या करोगे इश्क़ को रुस्वा अदब से महफिलें चलती हैं हुक्मों से नहीं चलती — Rohit Gustakh
जिसे तुम कह रहे हो प्यार अपना सुनो प्यारे अमानत है किसी की — Rohit Gustakh
किसे मालूम था क्या कर चुका था मैं मुझे जब होश आया मर चुका था मैं — Rohit Gustakh
ज़माने में किसी से दिल लगाकर किसी का दिल दुखाया था किसी ने — Rohit Gustakh
महकते हैं अभी तक हाथ ख़ुशबू से कि गुल के गाल खींचे थे कभी हम ने — Rohit Gustakh
मुहब्बत में बिछड़ने की ग़लत-फ़हमी हुई होगी वगरना कौन करता है बग़ावत राजधानी में — Rohit Gustakh
इक दुश्मन को साथ रखा है तू ने दुखती रग पर हाथ रखा है तू ने — Rohit Gustakh
वक़्त की थी कमी गर्दिशों के थे दिन वक़्त देना पड़ा हर किसी के लिए — Rohit Gustakh

Ghazal

हर पल इक पागल की ख़ातिर ख़्वाब सजाए कल की ख़ातिर जिस पल में जीनी थीं सदियाँ आया वो इक पल की ख़ातिर बेच गिटार हुआ दीवाना तेरी इस पायल की ख़ातिर ले आए दिल बुनकर अपना सर्दी में कंबल की ख़ातिर ठुकरा दी है जग की दौलत इक तेरे आँचल की ख़ातिर ग़ालिब की गलियों में हम भी भटके नज़्म ग़ज़ल की ख़ातिर क़ैद किया वारिद को हम ने आज तिरे काजल की ख़ातिर रहती है अनबन पेड़ों में उस मीठी कोयल की ख़ातिर मोड़ लिया मुँह सब रागों से नदियों की कल कल की ख़ातिर ज़ुल्म सहे कीचड़ के हम ने उस महबूब कमल की ख़ातिर किस को अपना समझे धरती जोगिन है बादल की ख़ातिर आज हुई दिल से गुस्ताख़ी छोड़ दिया सब कल की ख़ातिर — Rohit Gustakh