दिल के घाव कभी तो भर जाएँगे
पर नज़रों से लोग उतर जाएँगे
हम सच की कुटिया के बाशिंदे हैं
झूठ अगर बोले तो मर जाएँगे
राजा दशरथ को ये इल्म कहाँ था
ख़ुद के वरदानों से मर जाएँगे
कौन डुबाएगा दरिया में हम को
ख़ुद पर राम लिखेंगे तर जाएँगे
— Rohit Gustakh
पर नज़रों से लोग उतर जाएँगे
हम सच की कुटिया के बाशिंदे हैं
झूठ अगर बोले तो मर जाएँगे
राजा दशरथ को ये इल्म कहाँ था
ख़ुद के वरदानों से मर जाएँगे
कौन डुबाएगा दरिया में हम को
ख़ुद पर राम लिखेंगे तर जाएँगे
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