नाम से डर के मुझ को डराता रहा
एक ग़म ज़िन्दगी भर सताता रहा
होश भी था मुझे था मैं मदहोश भी
दीप जलता रहा फड़फड़ाता रहा
— Rohit Gustakh
एक ग़म ज़िन्दगी भर सताता रहा
होश भी था मुझे था मैं मदहोश भी
दीप जलता रहा फड़फड़ाता रहा
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