Meaning of

मता-ए-जाॅं

mata-e-jaan • متاع جاں

प्रिय वस्तु; दिल का खजाना

beloved possession; treasure of the heart

محبوب چیز; دل کا خزانہ

Persian

ये दूरियाँ तो रास्तों की हैं मता-ए-जाँ कि नक़्शे में तो तुम बहुत क़रीब लगती हो — Naresh sogarwal 'premi'
इसीलिए तो दिया दिल मता-ए-जान तुम्हें किसी भी आन पलट सकते थे ज़बान से हम — Mohit Dixit
ये मुझ सेे चाँद तारे कह रहे हैं मता-ए-जाँ तुम्हें बाँहों में ले लूँ — Shajar Abbas
मता-ए-जान अगर तुम मुझे इजाज़त दो तो इक गुलाब लगा दूँ तुम्हारी ज़ुल्फ़ों में — Shajar Abbas
तुम आना जब मिरे दिन अच्छे हों मता-ए-जाँ बुरा है वक़्त अभी और अच्छे दिन नहीं मालूम — Naresh sogarwal 'premi'
बहलाओगी खिलौनों से कब तक यूँँ अपना दिल छोड़ो ये आओ इश्क़ करो तुम मता-ए-जाँ — Shajar Abbas
लिबास-ए-सुर्ख़ करो ज़ेब-ए-तन मता-ए-जाँ लिबास-ए-सुर्ख़ में तुम इक गुलाब लगती हो — Shajar Abbas
तेरी आँखें तेरे रुख़सार तेरे लब तेरा चेहरा मता-ए-जाँ किसी शाइ'र का मुझ को ख़्वाब लगता है — Shajar Abbas

मता-ए-जाॅं एक ऐसा शब्द है जो प्रिय प्रेम और गहरे स्नेह की भावना को समेटे हुए है। अपने मूल अर्थ में, यह किसी प्रिय वस्तु या व्यक्ति को संदर्भित करता है, एक खजाना जो दिल में बसता है। कविता ने इसे अमूर्त, भावनाओं और यादों को भी शामिल करने के लिए विस्तारित किया है, जिन्हें कोई अपने पास रखता है।

कवि अक्सर 'मता-ए-जाॅं' का उपयोग अपने प्रिय के प्रति अपने स्नेह की गहराई को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह किसी व्यक्ति, स्मृति, या यहां तक कि एक आदर्श का प्रतीक हो सकता है जिसे कोई प्रिय मानता है। यह शब्द लालसा और श्रद्धा की भावना से ओतप्रोत है, अक्सर प्रेम की खट्टे-मीठे स्वभाव को जागृत करता है।

मता-ए-जाॅं दिल के सबसे प्रिय स्नेहों को समेटे हुए है, प्रेम की स्थायी उपस्थिति का एक काव्यात्मक आलिंगन।