Meaning of

मता-ए-दीन-ओ-दानिश

mata-e-deen-o-daanish • خیرو

धर्म और ज्ञान की संपत्ति; आध्यात्मिक और बौद्धिक खज़ाना

wealth of religion and knowledge; spiritual and intellectual treasures

دین و دانش کی دولت; روحانی اور علمی خزانہ

Persian

हम ऐसा कहने वाले जब तलक है ग़ज़ल बंदूक़ पर भारी रहेगी — Ali Zaryoun
यूँंँ हक़ जताते मैं ग़ज़ल हूँ वो तख़ल्लुस है कोई बहरों में करते क़ैद मिसरे रब्त में होते नहीं — Priya omar
सिर झुकाऊँगा सब को भरोसा न था देख कर मैं तुझे ख़ुद-ब-ख़ुद झुक गया — Shubham Rai 'shubh'
जिस ने गंगा में वुज़ू कर के नमाज़े हैं पढ़ी वो कभी मुल्क के ग़द्दार नहीं हो सकते — Mohammad Aquib Khan
हाँ मैं तो लिए फिरता हूँ इक सजदा-ए-बेताब उन से भी तो पूछो वो ख़ुदा हैं कि नहीं हैं — Hafeez Jalandhari
बे-गिनती बोसे लेंगे रुख़-ए-दिल-पसंद के आशिक़ तिरे पढ़े नहीं इल्म-ए-हिसाब को — Haidar Ali Aatish
छोड़ जाओ मुझे आइना देख लो ख़ूब-सूरत नहीं एक ग़द्दार हो — Trinetra Dubey

इस वाक्यांश में आध्यात्मिक और बौद्धिक प्रयासों की समृद्धि का आभास होता है। यह भौतिक संपत्ति से परे एक ऐसी संपत्ति का सुझाव देता है, जो ज्ञान और विश्वास के गहरे मूल्य को रेखांकित करता है।

कवियों द्वारा इस वाक्यांश का उपयोग अक्सर भौतिक संपत्ति और आत्मा की सच्ची समृद्धि के बीच के अंतर को उजागर करने के लिए किया जाता है। इसे पाठकों को ज्ञान और विश्वास के स्थायी मूल्य की याद दिलाने के लिए उद्धृत किया जाता है, जो क्षणिक सांसारिक लाभों से अधिक महत्वपूर्ण हैं।

कविता में 'मता-ए-दीन-ओ-दानिश' मानव आत्मा को वास्तव में समृद्ध करने वाले खज़ानों की एक कोमल याद दिलाता है।