Meaning of

मन्द

mand • مند

धीमा; कोमल; मृदु

slow; gentle; mild

آہستہ; نرم; ملائم

Sanskrit

उदासी इक समुंदर है कि जिस की तह नहीं है
मैं नीचे और नीचे और नीचे जा रहा हूँ

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कोई समुंदर, कोई नदी होती कोई दरिया होता
हम जितने प्यासे थे हमारा एक गिलास से क्या होता

ता'ने देने से और हम पे शक करने से बेहतर था
गले लगा के तुम ने हिजरत का दुख बाट लिया होता

164

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प्यास अगर मेरी बुझा दे तो मैं जानू वरना
तू समुंदर है तो होगा मेरे किस काम का है

110

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कोई समुन्दर, कोई नदी होती, कोई दरिया होता
हम जितने प्यासे थे हमारा एक गिलास से क्या होता?

85

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ख़ुद को मनवाने का मुझ को भी हुनर आता है
मैं वो कतरा हूँ समुंदर मेरे घर आता है

84

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दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे
जब कभी हम दोस्त हो जाएँ तो शर्मिंदा न हों

83

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झूठों ने झूठों से कहा है सच बोलो
सरकारी एलान हुआ है सच बोलो

घर के अंदर तो झूठों की एक मंडी है
दरवाज़े पर लिखा हुआ है सच बोलो

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रुक गया दरिया समुन्दर बह गया
और फिर आख़िर हिमालय ढह गया

67

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हर एक लफ़्ज़ के तेवर ही और होते हैं
तेरे नगर के सुख़न-वर ही और होते हैं

तुम्हारी आँखों में वो बात ही नहीं ऐ दोस्त
डुबोने वाले समुंदर ही और होते हैं

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वो अक़्ल-मंद कभी जोश में नहीं आता
गले तो लगता है आग़ोश में नहीं आता

61

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उदासी इक समुंदर है कि जिस की तह नहीं है
मैं नीचे और नीचे और नीचे जा रहा हूँ

60

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कोई समुंदर, कोई नदी होती कोई दरिया होता
हम जितने प्यासे थे हमारा एक गिलास से क्या होता

ता'ने देने से और हम पे शक करने से बेहतर था
गले लगा के तुम ने हिजरत का दुख बाट लिया होता

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'मन्द' शब्द धीमेपन और कोमलता का भाव लिए हुए है। यह एक ऐसी गति का सुझाव देता है जो अविचलित और शांत है, अक्सर एक शांतिपूर्ण और शांति भरे वातावरण को जगाता है। कविता में, यह समय के कोमल प्रवाह या भावनाओं के मृदु उन्मेष का प्रतीक हो सकता है।

कवि 'मन्द' का प्रयोग धीमी गति से बहती नदी की शांति या पत्तों की कोमल सरसराहट को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह हवा की मृदु फुसफुसाहट या सांझ के समय धीरे-धीरे धुंधलाने वाले प्रकाश का वर्णन भी कर सकता है।

अपनी कोमल बाहों में, 'मन्द' एक काव्यात्मक विराम प्रस्तुत करता है। यह जीवन के शांत क्षणों की सुंदरता पर चिंतन के लिए आमंत्रित करता है।