Meaning of

मर्म

marm • مرم

सार; मूल

essence; core

جوہر; اصل

Sanskrit

वो पुराने ज़ख़्म सारे भर रहा हूँ मैं मरम्मत ज़िंदगी की कर रहा हूँ — ABhishek Parashar
मिरा भी दौर आएगा अभी तो मरम्मत चल रही है ज़िंदगी की — ABhishek Parashar
अपनी मिट्टी ही पे चलने का सलीक़ा सीखो संग-ए-मरमर पे चलोगे तो फिसल जाओगे — Iqbal Azeem
हाँ करो कोई मोहब्बत अब मुझे भी मेरा दिल भी अब मरम्मत चाहता है — ABhishek Parashar
गरीबों की मुहब्बत का नहीं है मोल कोई अब वगर्ना देखते सारे जहाँ में संगमरमर तुम — Ganesh gorakhpuri

'मर्म' शब्द किसी चीज़ का सार या आंतरिक मूल को पकड़ता है। कविता में, यह भावनाओं के दिल में उतरता है, सतह के नीचे छिपे सत्य की खोज करता है।

कवि अक्सर 'मर्म' का उपयोग मानव अनुभव के गहरे सत्य की खोज के लिए करते हैं। यह छिपी हुई भावनाओं या कार्यों के पीछे के उद्देश्यों को प्रकट कर सकता है।

कविता के क्षेत्र में, 'मर्म' हमें स्पष्ट से परे देखने के लिए आमंत्रित करता है, उन गहन सत्यों की खोज करने के लिए जो हमारे अस्तित्व को परिभाषित करते हैं।