इक टूटे हुए दिल की मरम्मत नहीं होतीफिर चाह के भी पहले सी उल्फ़त नहीं होतीबस जाती है महबूब की तस्वीर नज़र मेंपलकों को झपकने की इजाज़त नहीं होती— Priya omar