Meaning of

माजी

maaji • عجیب سی

अतीत; बीते हुए समय

past; bygone times

ماضی; گزرا ہوا وقت

Arabic

लकड़ी की तैग़ वाले वो ग़ाज़ी कहाँ गए
जन्नत के दा'वेदार मजाज़ी कहाँ गए

रमज़ान में तो आख़िरी सफ़ तक जगह न थी
अब ख़ाली मस्जिदें हैं, नमाज़ी कहाँ गए

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जब भी माज़ी के ज़ख़्मों पर मुझे हवा लगती है
बन के मरहम दिल पे सिगरेट ही दवा लगती है

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माज़ी भी है उदास मेरे हाल की तरह
ये साल भी गुज़र गया हर साल की तरह

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दर्द का आलम सुनहरा, भेज दे
काश माज़ी, लुत्फ़-ए-ईज़ा भेज दे

वाक़या, दिल टूट जाने का मेरे
और तेरे ज़ुल्मों का, क़िस्सा भेज दे

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आज लड़की नई इक नमाज़ी बनी
देखना भीड़ कल से बढ़ेगी यहाँँ

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ये नए लड़के जब कुछ सुनाते हैं मुझ को
माज़ी के माजरे याद आते हैं मुझ को

सातवें जन्म में बिछड़ा है मुझ सेे वो शख़्स
पिछले छह जन्मों के ख़्वाब आते हैं मुझ को

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ये दिसंबर की फ़िज़ाएँ अक्सर
दिल के शोलों को हवा देती हैं

जाने जाँ आज भी ठंडी रातें
अपने माज़ी का पता देती हैं

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इस तरह से न फेर तू नज़रें
याद कर था कभी हमारा भी

ज़िक्र-ए-माज़ी न छेड़ तू मुझ से
बात कर रंज के अलावा भी

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अब रहम कोई खाएगा क्या मेरे हाल पर
जब तुम ने मुझ को छोड़ दिया मेरे हाल पर

मुसतक़बिल अच्छा गुज़रेगा अपना न जाने कब
माज़ी भी मुस्कुराने लगा मेरे हाल पर

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हर एक को अपना समझ लेता हूँ मैं
अपनी ग़ज़ल से ही उलझ लेता हूँ मैं

चलता हूँ मैं जब तल्ख़ माज़ी को भुला
हर पल को फिर बीता समझ लेता हूँ मैं

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लकड़ी की तैग़ वाले वो ग़ाज़ी कहाँ गए
जन्नत के दा'वेदार मजाज़ी कहाँ गए

रमज़ान में तो आख़िरी सफ़ तक जगह न थी
अब ख़ाली मस्जिदें हैं, नमाज़ी कहाँ गए

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जब भी माज़ी के ज़ख़्मों पर मुझे हवा लगती है
बन के मरहम दिल पे सिगरेट ही दवा लगती है

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माजी एक प्रकार की पुरानी यादों और चिंतन की भावना को जागृत करता है। यह समय की छाया है जो यादों में बनी रहती है, अक्सर मिठास और दुःख दोनों के साथ रंगी होती है।

कवि माजी का उपयोग खोए हुए प्रेम, भूले हुए सपनों और समय के प्रवाह की थीम को खोजने के लिए करते हैं। यह जीवन की क्षणभंगुर प्रकृति को चित्रित करने के लिए एक कैनवास है।

माजी क्षणों की अस्थिरता की एक कोमल याद दिलाता है। यह आज के कानों में कल की कहानियाँ फुसफुसाता है।