Meaning of

यख़

yakh • یخ

बर्फ; ठंडक

ice; coldness

برف; سردی

Persian

ज़ुलेख़ा-ए-अज़ीज़ाँ बात ये है भला घाटे का सौदा क्यूँ करें हम — Jaun Elia
रेख़्ते के तुम्हीं उस्ताद नहीं हो 'ग़ालिब' कहते हैं अगले ज़माने में कोई 'मीर' भी था — Mirza Ghalib
तर-दामनी पे शैख़ हमारी न जाइयो दामन निचोड़ दें तो फ़रिश्ते वज़ू करें — Khwaja Meer Dard
इसी दुनिया में दिखा दें तुम्हें जन्नत की बहार शैख़ जी तुम भी ज़रा कू-ए-बुताँ तक आओ — Ali Sardar Jafri
मयख़ाने की क़द्र है मेरी नज़रों में इसने जाने कितनी मौतें टाली हैं — Harsh saxena
मैं चीख़ता रहा कुछ और भी है मेरा इलाज मगर ये लोग तुम्हारा ही नाम लेते रहे — Anjum Saleemi
ज़िक्र तबस्सुम का आते ही लगते हैं इतराने लोग और ज़रा सी ठेस लगी तो जा पहुँचे मयख़ाने लोग — Ateeq Allahabadi
हम शैख़, न लीडर, न मुसाहिब, न सहाफ़ी जो ख़ुद नहीं करते वो हिदायत न करेंगे — Faiz Ahmad Faiz
शब की हवा से हार गई मेरे दिल की आग यख़-बस्ता शहर में कोई रद्द-ओ-बदल न था — Qaisar-ul-Jafri

'यख़' शब्द बर्फ की कठोर, अडिग प्रकृति को दर्शाता है। यह शारीरिक ठंडक और भावनात्मक दूरी दोनों का प्रतीक है जो ठंडक ला सकती है। कविता में, यह अक्सर एकाकीपन या समय के बीतने को दर्शाता है।

कवि 'यख़' का उपयोग एकाकीपन की भावनाओं, सर्दी की कठोरता, या समय की धीमी, अपरिहार्य चाल को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह गर्मजोशी और जीवन्तता के विपरीत है।

अपनी बर्फीली बाहों में, 'यख़' स्थिरता और चिंतन की शांत शक्ति को धारण करता है।