Meaning of

रंजोगम

ranjogam • رنج و غم

दुःख और शोक; उदासी

sorrow and grief; melancholy

دکھ اور غم; اداسی

Persian

लोग रंज-ओ-ग़म छुपा कर अपना अपना
मुस्कुरा के मिलते हैं इक दूसरे से

0

Download Image

क्या हो गया है दिल को जो यूँँ चीख़ता है ये
आवाज़ रोज़ रोज़ किसे दे रहा है ये

दुनिया शराब ज़हर इसे नाम कुछ भी दे
पर हम तो जानते हैं ग़मों की दवा है ये

जाँ को मेरी क़रार भी जुज़ रंज-ओ-ग़म कहाँ
अब कोई मसअला न रहा मसअला है ये

हम से निगाह फेर के जाना हुज़ूर का
फिर शर्तिया नया कोई तर्ज़-ए-जफ़ा है ये

भागा करे उधर कि जिधर रास्ता नहीं
दिल को कहें भी क्या कि कहाँ मानता है ये

अब और छेड़िए न मेरे दिल को देखिए
पहले ही ज़ार ज़ार लहू रो चुका है ये

इक बार 'मुन्तज़िर' जो लगाया ज़बान से
फिर उम्र भर न जाएगा कैसा नशा है ये

4

Download Image

रंज-ओ-ग़म जिन
में मुब्तला था दिल
उन की तफ़्तीश कर रहा हूँ मैं

3

Download Image

मेरे ज़ख़्मों को अब मरहम मिले हैं
मिले हैं यार लेकिन कम मिले हैं

शजर क्या क्या मिला है आशिक़ी में
फ़रेब-ओ-ज़ख़्म रंज-ओ-ग़म मिले हैं

2

Download Image

हौसला गर हो टूट जाने का
तब कहीं जा के दिल लगाने का

ज़िंदगी रंज-ओ-ग़म का दरिया है
इश्क़ है नाम डूब जाने का

2

Download Image

सब रंज ओ ग़म भी गुम थे जब मिरे साथ तुम थे
वो दौर था हमारा कितना हँसी ख़ुशी का

2

Download Image

माथे पर न शिकन दिख जाए, होंठों को सी जाते हैं
हम हँसते-हँसते ही सारे रंज-ओ-ग़म पी जाते हैं

कुछ कुछ पानी के क़तरे सी फ़ितरत पाली है हम ने
गर हाथों से फिसले तो फिर यार फिसल ही जाते हैं

1

Download Image

ग़ालिब के रंज-ओ-ग़म देख के माना हम उन से अच्छे
उन को पढ़ के समझे क्या है दिया उस सूरज के आगे

1

Download Image

तेरे बा'द अब हम दरख़्तों से भी बदले लेंगे
परिंदे उड़ा कर के पेड़ो की तस्वीरे लेंगे

ख़ुदा के बनाए हुए है ये रंज-ओ-ग़म-ए-दिल
ख़ुदा जब भी चाहेगा ख़ुद अपने ये रस्ते लेंगे

0

Download Image

मुझ को अज़ीज़ ऐसे हैं दुनिया के रंज-ओ-ग़म
जैसे किसी फ़क़ीर को कासा अज़ीज़ हो

0

Download Image

लोग रंज-ओ-ग़म छुपा कर अपना अपना
मुस्कुरा के मिलते हैं इक दूसरे से

0

Download Image

क्या हो गया है दिल को जो यूँँ चीख़ता है ये
आवाज़ रोज़ रोज़ किसे दे रहा है ये

दुनिया शराब ज़हर इसे नाम कुछ भी दे
पर हम तो जानते हैं ग़मों की दवा है ये

जाँ को मेरी क़रार भी जुज़ रंज-ओ-ग़म कहाँ
अब कोई मसअला न रहा मसअला है ये

हम से निगाह फेर के जाना हुज़ूर का
फिर शर्तिया नया कोई तर्ज़-ए-जफ़ा है ये

भागा करे उधर कि जिधर रास्ता नहीं
दिल को कहें भी क्या कि कहाँ मानता है ये

अब और छेड़िए न मेरे दिल को देखिए
पहले ही ज़ार ज़ार लहू रो चुका है ये

इक बार 'मुन्तज़िर' जो लगाया ज़बान से
फिर उम्र भर न जाएगा कैसा नशा है ये

4

Download Image

रंजोगम दुःख और शोक का मिश्रण है, जो अक्सर हृदय में बनी रहने वाली उदासी को दर्शाता है। कविता में, यह भावनात्मक बोझों के भार और उनके साथ आने वाले शांत दुःख को व्यक्त करता है।

कवि इसे दुःख की स्थायी प्रकृति को व्यक्त करने के लिए उपयोग करते हैं, अक्सर खोए हुए प्रेम या अधूरी इच्छाओं के संदर्भ में। यह क्षणिक खुशियों और स्थायी उदासी के बीच के अंतर को उजागर करता है।

रंजोगम जीवन के खट्टे-मीठे क्षणों का सार पकड़ता है, जहाँ दुःख और सुंदरता सह-अस्तित्व में होते हैं।