मेरे ज़ख़्मों को अब मरहम मिले हैंमिले हैं यार लेकिन कम मिले हैंशजर क्या क्या मिला है आशिक़ी मेंफ़रेब-ओ-ज़ख़्म रंज-ओ-ग़म मिले हैं— Shajar Abbas