
तेरे बा'द अब हम दरख़्तों से भी बदले लेंगे
परिंदे उड़ा कर के पेड़ो की तस्वीरे लेंगे
ख़ुदा के बनाए हुए है ये रंज-ओ-ग़म-ए-दिल
ख़ुदा जब भी चाहेगा ख़ुद अपने ये रस्ते लेंगे
— Chandrajeet Regar
Other sher from the same pen
Shers of raasta.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling