Meaning of

शुआ

shua • شعا

किरण; प्रकाश; झलक

ray; beam; glimmer

کرن; روشنی; جھلک

Arabic

अमीर इमाम के अश'आर अपनी पलकों पर तमाम हिज्र के मारे उठाए फिरते हैं — Ameer Imam
सब ख़्वाहिशें पूरी हों 'फ़राज़' ऐसा नहीं है जैसे कई अश'आर मुकम्मल नहीं होते — Ahmad Faraz
शब-ए-फ़िराक़ में अश'आर आशकार हुए मुझे नहीं है सनम तुझ सेे अब गिला कोई — Amaan Pathan
लबों में आ के क़ुल्फ़ी हो गए अश'आर सर्दी में ग़ज़ल कहना भी अब तो हो गया दुश्वार सर्दी में — Sarfaraz Shahid
मेरे अश'आर पढ़ने वाले लोग तेरी तस्वीर माँग बैठे हैं — Shadab Javed
इस लिए नहीं रोया अश'आर में वज़्न से बाहर थी मेरी सिसकियाँ — Saad Ahmad
उस हिज्र पे तोहमत कि जिसे वस्ल की ज़िद हो उस दर्द पे ला'नत की जो अश'आर में आ जाए — Vipul Kumar

'शुआ' का मूल अर्थ है प्रकाश की किरण, जो अंधकार को चीरती है। कविता में यह आशा, ज्ञान और क्षणिक सुंदरता का प्रतीक बन जाती है।

कवि अक्सर 'शुआ' का उपयोग सुबह की पहली किरण, तूफान के बाद की पहली रोशनी, या प्रेम और प्रेरणा की हल्की चमक को दर्शाने के लिए करते हैं। यह छायाओं और अंधकार के विपरीत, स्पष्टता और प्रकाशन के क्षणों को उजागर करता है।

कविता की दुनिया में, 'शुआ' उस प्रकाश की कोमल याद दिलाती है, जो सबसे गहरे सायों में भी बना रहता है।