Meaning of

ज़ाइक़ा

zaika • ذائقہ

स्वाद; रस

taste; flavor

ذائقہ; مزہ

Arabic

ज़िन्दगी का ज़ाएका अब हम से पूछो उस के लब चू में हैं सो मीठा लगेगा — Neeraj Neer
वो मुझ सेे ले कर जाती दो बोसे अपने माथे पर और मेरे होंठों पे अपना ज़ाइका छोड़ के जाती थी — Siddharth Saaz
किताबें, रिसाले न अख़बार पढ़ना मगर दिल को हर रात इक बार पढ़ना — Bashir Badr
घर लौट के रोएँगे माँ बाप अकेले में मिट्टी के खिलौने भी सस्ते न थे मेले में — Qaisar-ul-Jafri
मैं जानता हूँ ज़ाइक़ा हर चॉकलेट का मेरे लबों पे आज तू अपने लबों को रख — Mukesh Jha

ज़ायका स्वाद की इंद्रियों को जगाने वाला शब्द है, जो स्वादों की मिठास का आनंद देता है। कविता में, यह शब्द अनुभवों के सार को समेटता है, उन भावनाओं की सूक्ष्मता को जो एक नाज़ुक स्वाद की तरह ठहर जाती हैं।

कवि अक्सर ज़ायका का उपयोग जीवन के अनुभवों की समृद्धि को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह यादों की खट्टे-मीठेपन, प्रेम की ठहरती हुई सुगंध, या क्षणिक आनंद का प्रतीक हो सकता है।

ज़ायका हमारे अनुभवों को परिभाषित करने वाली इंद्रियों और भावनात्मक परतों की याद दिलाता है। यह जीवन के उन स्वादों पर विचार करने के लिए आमंत्रित करता है जो क्षण बीत जाने के बाद भी ठहर जाते हैं।