Meaning of

अतराफ़

ataraaf • اطراف

परिवेश; बाहरी क्षेत्र; परिधि

surroundings; outskirts; periphery

گرد و نواح; مضافات; حاشیہ

Arabic

यूँँ भटकता नवी यहाँ हर पहर
जो है इस शहर तो कभी उस शहर

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मैं हूँ सदियों से भटकता हुआ प्यासा दरिया
ऐ ख़ुदा कुछ तो समुंदर के सिवा दे मुझ को

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इसी फ़कीर की गफ़लत से आगही ली है
मेरे चराग़ से सूरज ने रौशनी ली है

गली-गली में भटकता है शोर करता हुआ
हमारे इश्क़ ने सस्ती शराब पी ली है

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मैं भटकता ही रहा दश्त-ए-शनासाई में
कोई उतरा ही नहीं रूह की गहराई में

क्या मिलाया है बता जाम-ए-पज़ीराई में
ख़ूब नश्शा है तेरी हौसला-अफ़जाई में

तेरी यादों की सुई, प्रेम का धागा मेरा
काम आए हैं बहुत ज़ख़्मों की तुरपाई में

डस रही है ये सियह-रात की नागिन मुझ को
भर रही ज़हर-ए-ख़मोशी, रग-ए-तन्हाई में

सुर्मा-ए-मक्र-ओ-फ़रेब आँखों में जब से है लगा
तब से है ख़ूब इज़ाफ़ा हद-ए-बीनाई में

फ़िक्र-ओ-फ़न, रंग-ए-तग़ज़्ज़ुल, न ग़ज़ल की ख़ुशबू
बस लगा रहता हूँ मैं क़ाफ़िया-पैमाई में

सीख पानी से हुनर काम 'अनीस' आएगा
दौड़ कर ख़ुद ही चला आता है गहराई में

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गुल सा तू तेरा साथ ख़ुशबू सा
हाथ में तेरा हाथ ख़ुशबू सा

हो के तुझ से जुदा भटकता हूँ
गुल से बिछड़ी अनाथ ख़ुशबू सा

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पागलों की तरह मैं भटकता रहा
इश्क़ के नाम पे हम ने क्या क्या किया

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इक शख़्स मेरी ज़िंदगी से क्या चला गया
यूँँ लग रहा है जैसे ख़ुदा था, चला गया

आँखों पे कोई रौशनी पड़ती चली गई
रस्ते से अपने फिर मैं भटकता चला गया

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तुम्हारे वासते जो अब नहीं क़ाबिल रहा हूँ मैं
उन्हें पूछो ज़रा जिन के लिए मुश्किल रहा हूँ मैं

भटकता फिर रहा हूँ बा'द तेरे इस तरह से मैं
कभी दरया कभी कश्ती कभी साहिल रहा हूँ मैं

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हर नफ़स आती है इक मानूस सी ख़ुशबू मुझे
क्या मेरे अतराफ़ में तेरी हवा है करबला

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रात भर मन भटकता रहा और मैं
चैन से सो न पाया तुम्हारी क़सम

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यूँँ भटकता नवी यहाँ हर पहर
जो है इस शहर तो कभी उस शहर

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मैं हूँ सदियों से भटकता हुआ प्यासा दरिया
ऐ ख़ुदा कुछ तो समुंदर के सिवा दे मुझ को

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'अतराफ़' शब्द किसी स्थान के किनारों और सीमाओं का सुझाव देता है। कविता में, यह अक्सर समाज के हाशिये या चेतना के किनारों का प्रतीक होता है, जहाँ ज्ञात अज्ञात से मिलता है।

कवि 'अतराफ़' का उपयोग अलगाव और संक्रमण के विषयों का पता लगाने के लिए करते हैं। यह शारीरिक और रूपक दोनों रूप में किनारे पर होने की भावना को जागृत कर सकता है। अक्सर अन्वेषण और खोज के विषयों के साथ जुड़ा होता है।

'अतराफ़' में, कविता किनारे पर नृत्य करती है, जहाँ परिचित रहस्यमय में विलीन हो जाता है।