
तुम्हारे वासते जो अब नहीं क़ाबिल रहा हूँ मैं
उन्हें पूछो ज़रा जिन के लिए मुश्किल रहा हूँ मैं
भटकता फिर रहा हूँ बा'द तेरे इस तरह से मैं
कभी दरया कभी कश्ती कभी साहिल रहा हूँ मैं
— anupam shah
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