Meaning of

ग़ुलाम

ghulaam • غلام

गुलाम; सेवक; अनुयायी

slave; servant; follower

غلام; خادم; پیروکار

Arabic

'जगत' मुझे मार कर के ख़ंजर वो पूछती ठीक तो हो ना तुम
ज़बान पर देखो तरबियत इस की ,लड़की ये कितनी बा-हया है

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आप क्यूँँ रोएँगे मेरी ख़ातिर
फ़र्ज़ ये सारे इस ग़ुलाम के हैं

दिन में सौ बार याद करता हूँ
पासवर्ड सारे तेरे नाम के हैं

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ये इश्क़-विश्क़ का क़िस्सा तमाम हो जाए
सफ़ेद दाढ़ी हवस की ग़ुलाम हो जाए

जवान लड़कियों बूढ़ों से तुम रहो हुश्यार
न जाने कौन कहाँ आसाराम हो जाए

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मोहब्बत हो या हो दुश्मन ग़ुलामी हम नहीं करते
झुकाने की जहाँ ज़िद हो सलामी हम नहीं करते

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ग़ुलामी में न काम आती हैं शमशीरें न तदबीरें
जो हो ज़ौक़-ए-यक़ीं पैदा तो कट जाती हैं ज़ंजीरें

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शाहज़ादी ख़बर नहीं तुझ को
तुझ पे कितने ग़ुलाम मरते हैं

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ज़िन्दा रहने के लिए आज भी आदम की ज़मी
सिर्फ़ हैदर के ग़ुलामों का लहू मांगती है

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तेरी ख़िदमत में लग गए जब से
दोस्त सारे ग़ुलाम कहते हैं

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उन के दर पर सलाम कह देना
मैं हूँ उन का ग़ुलाम कह देना

उन सेे मिलने की दिल में ख़्वाहिश है
मेरा इतना पयाम कह देना

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इस उसूल-ए-इश्क़ में तस्लीम ख़ुद को कर दिया जब
तब दिखाया जादू उस ने हम ग़ुलामी कर रहे हैं

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'जगत' मुझे मार कर के ख़ंजर वो पूछती ठीक तो हो ना तुम
ज़बान पर देखो तरबियत इस की ,लड़की ये कितनी बा-हया है

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आप क्यूँँ रोएँगे मेरी ख़ातिर
फ़र्ज़ ये सारे इस ग़ुलाम के हैं

दिन में सौ बार याद करता हूँ
पासवर्ड सारे तेरे नाम के हैं

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'ग़ुलाम' पारंपरिक रूप से एक गुलाम या सेवक को संदर्भित करता है, जो कर्तव्य से बंधा होता है। कविता में, यह अक्सर भक्ति और समर्पण के विषयों को दर्शाता है, जहाँ दिल प्रेम या दिव्य इच्छा का 'ग़ुलाम' बन जाता है।

कवि 'ग़ुलाम' का उपयोग समर्पण में स्वतंत्रता के विरोधाभास को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह प्रेमी की भक्ति या उच्च शक्ति के प्रति आत्मा के समर्पण का प्रतीक हो सकता है।

कविता में, 'ग़ुलाम' दिल की प्रेम और विश्वास की स्वेच्छा से लगी जंजीरों को प्रकट करता है।