mohabbat ho ya ho dushman ghulaami ham nahin karte | मोहब्बत हो या हो दुश्मन ग़ुलामी हम नहीं करते

  - Aditya

मोहब्बत हो या हो दुश्मन ग़ुलामी हम नहीं करते
झुकाने की जहाँ ज़िद हो सलामी हम नहीं करते

  - Aditya

Motivational Shayari in Hindi

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