Aditya
Aditya
Ghazal

मोहब्बत तू जो करता है वफ़ाएँ क्यूँँ नहीं करता

मेरे ज़ख़्मों की आख़िर तू दवाएँ क्यूँ नहीं करता

तू मेरा चाहने वाला तो हरगिज़ हो नहीं सकता
अगर है तो मेरे हक़ में दुआएँ क्यूँ नहीं करता

ये इंसाँ की ख़ता है कि मोहब्बत कर तो लेता है
मोहब्बत को निभाने की ख़ताएँ क्यूँ नहीं करता

चराग़ों की नुमाइश में ख़लल हर कोई करता है
कोई सूरज बुझाने को हवाएँ क्यूँ नहीं करता

— Aditya

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