Aditya
Aditya
Sher

मोहब्बत समझ हम को आने लगी है

जो आँखों की नींद अब ठिकाने लगी है

चुराती थी पहले ज़माने से नज़रें
वो हम से क्यूँ नज़रें चुराने लगी है

— Aditya

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